बुधवार, 17 फ़रवरी 2016

गाय अनुदान का नहीं, सम्मान का विषय है. गाय की एक ही इच्छा है कि हम लोग उन्हें मां कहें, तो वह सारे वैभव हमें दे सकती है.

भारत की समृद्धि गौवंश की वृद्धि में ही निहित है. सुनियोजित साजिश के तहत अंग्रेजों के शासनकाल में भारतीय नस्ल की गायों को खत्म करने का सिलसिला शुरू किया गया था. इस सिलसिले को अब पूरी तरह से बंद करने और गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए 28 फरवरी 2016 को दिल्ली में 20 लाख लोगों को एकत्र किया जायेगा. 
 
यह जानकारी गौवंश के लिए खुद को समर्पित कर चुके गोपाल मणि जी महाराज ने महानगर में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में दी. उन्होंने कहा कि हमें पता है कि केंद्र में सत्तारूढ़ सरकार महत्वपूर्ण विषयों से संबंधित विधेयकों को राज्यसभा में पारित नहीं करवा पा रही है, लेकिन मुझे  पूरा विश्वास है कि राष्ट्रहित के इस मुद्दे पर महामहिम राष्ट्रपति दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुला कर एक ऐतिहासिक भूमिका निभायेंगे.
 
गौकथा वाचक गोपाल मणि महाराज ने कहा कि यह विषय किसी धर्म या संप्रदाय विशेष से जुड़ा नहीं है, बल्कि इससे भारत की अर्थव्यवस्था और भूमि की उर्वरा शक्ति भी जुड़ी हुई है.
 
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय को माता के रूप में स्वीकार किया गया है. गाय को छोड़ कर किसी भी जीव का मल-मूत्र पवित्र नहीं माना गया है. गाय पृथ्वी की अवतार है. यह विश्व की मां है. अंगरेजों ने एक सर्वे के माध्यम से यह जान लिया कि गाय और गंगा को मिटा दिया जाये, तो भारत स्वत: ही मिट जायेगा, इसलिए सबसे पहले उन्होंने गाय का कसाइखाना पहली बार कलकत्ता में ही खोला. अंगरेजों ने समझ लिया था कि जब तक भारत के लोग गाय को पालतू जानवर नहीं समङोंगे, तब तक भारत को पराजित नहीं किया जा सकता. 
 
इसलिए उन्होंने गाय की चरबी को बंदूक की गोली में इस्तेमाल किया. 1857 की क्रांति इसी गोली की वजह से शुरू हुई. महात्मा गांधी ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा था कि स्वराज और गाय में उन्हें चुनना होगा, तो वह गाय को चुनेंगे. गाय ही भारत की आजादी है. गाय अनुदान का नहीं, सम्मान का विषय है. गाय की एक ही इच्छा है कि हम लोग उन्हें मां कहें, तो वह सारे वैभव हमें दे सकती है.
उन्होंने कहा कि अब तक वह भारत के 33 राज्यों में गौ हुंकार रैली व गौ कथा द्वारा सफलतापूर्वक जनजागरण किया है. अब देश की राजधानी दिल्ली में आगामी २८ फ़रवरी २०१६ को रामलीला मैदान में किया जायेगा. 
 
गोपाल मणि महाराज ने केंद्र व राज्य सरकारों के सामने अपनी पांच मांगें रखी हैं. इनमें गौ माता को राष्ट्रमाता के पद पर सुशोभित करने के साथ गौ मंत्रलय की स्थापना करने, गौ अनुसंधान केंद्रों की स्थापना, 10 वर्ष तक के बच्चों को सरकार की ओर से भारतीय गाय का दूध नि:शुल्क उपलब्ध कराना, जर्सी आदि विदेशी गायों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना और गौ हत्यारों के लिए मृत्यु दंड का प्रावधान रखना शामिल है.
 
उन्होंने कहा कि देश को भ्रष्टाचार मुक्त करने के लिए सभी को संस्कार युक्त करना होगा, इसलिए कम से कम 10 वर्ष के बच्चों को गाय का दूध उपलब्ध कराना होगा. तभी बच्चे संस्कारी होंगे. 

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